Skip to content

एक दृढ़ बरगद की तरह वट सावित्री में : शाखा का चिन्ह

वट-वृक्ष, बरगद या बड़ का वृक्ष दक्षिण एशियाई आध्यात्मिकता में केन्द्रीय स्थान रखता है और यह भारत का राष्ट्रीय वृक्ष है। यह यम के साथ जुड़ा है, जो कि मृत्यु का देवता है, इसलिए, इसे अक्सर शमशान भूमि के निकट लगाया जाता है। इसकी पुन: अँकुरित हो जाने की क्षमता के कारण इसके पास लम्बी आयु होती है और यह अमरता का प्रतीक है। एक घटना बरगद के वृक्ष के नीचे ही घटी थी, जिसमें सावित्री ने अपने मृत पति और राजा सत्यवान को जीवन दान दिए जाने के लिए यम से मोल भाव किया था, ताकि उसे एक पुत्र की प्राप्ति हो सके – वट पूर्णिमा और वट सावित्री के वार्षिक उत्सवों को इसी के लिए स्मरण किया जाता है।

कुछ इसी के जैसा एक वृतान्त बाइबल के पुराने नियम में भी मिलता है। वहाँ पर एक मृत वृक्ष…पुन: जीवन में वापस लौट आते हुए…राजाओं की मृत वंश रेखा से एक नए पुत्र का प्रतिनिधित्व करता है। इस वृतान्त में सबसे बड़ा अन्तर यह है, इसमें एक भविष्य-की-ओर देखते हुए भविष्यद्वाणी दी गई है और इसे सैकड़ों वर्षों से विभिन्न भविष्यद्वक्ताओं (ऋषियों) के द्वारा विकसित किया गया था। यह मिश्रित कहानी किसी  के आगमन की भविष्यद्वाणी कर रही थी। जिस व्यक्ति ने पहली बार इस कहानी को बताया, वह यशायाह (750 ईसा पूर्व) था, जिसके ऊपर और अधिक विस्तार उसके पश्चात् आने वाले ऋषियों-भविष्यद्वक्ताओं ने – मृत वृक्ष से निकलने वाली शाखा  के रूप में किया।

यशायाह और शाखा

यशायाह ऐतिहासिक रूप से पुष्टि किए जाने वाले समय में रहा था, जिसे नीचे दी हुई  समयरेखा में देखा जा सकता है। यह समयरेखा यहूदियों के इतिहास से ली गई है

यशायाह को ऐतिहासिक समयरेखा में दिखाया गया। वह इस्राएल के दाऊदवंशीय राजाओं के समयकाल में रहा था।
यशायाह को ऐतिहासिक समयरेखा में दिखाया गया। वह इस्राएल के दाऊदवंशीय राजाओं के समयकाल में रहा था।

आप देख सकते हैं कि यशायाह की पुस्तक दाऊद के राजकीय वंशकाल (1000-600 ईसा पूर्व) के समय में यरूशलेम के शासन में लिखी गई थी। यशायाह के समय (750 ईसा पूर्व) में यह वंश और यहूदी साम्राज्य भ्रष्ट हो चुके थे। यशायाह ने राजाओं को परमेश्‍वर और मूसा की दस आज्ञाओं की भलाई और भावनाओं की ओर लौट आने का अनुरोध किया। परन्तु यशायाह जानता था कि इस्राएल पश्चाताप नहीं करेगा, और इसलिए उसने पहले से ही देख लिया कि यह राज्य नष्ट कर दिया जाएगा और इसके राजाओं का शासन करना समाप्त हो जाएगा।

उसने इस राजवंश के लिए एक प्रतीक का उपयोग किया, यह एक बड़ बरगद के वृक्ष की तरह चित्रित किया था। यह वृक्ष राजा दाऊद के पिता यिशै के जड़ पर आधारित था। यिशै पर आधारित हो राजाओं का राजवंश दाऊद के साथ आरम्भ हुआ था, और उसके उत्तराधिकारी, राजा सुलैमान के साथ आगे बढ़ा, और यह इसी तरह से एक के पश्चात् दूसरे राजा के आने के द्वारा आगे वृद्धि करता रहा। जैसा कि नीचे दिए हुए चित्र में चित्रित किया गया है, वृक्ष निरन्तर वृद्धि करता गया, जब राजवंश का अगला पुत्र राज्य करने लगा।

यशायाह के द्वारा राजवंश के लिए उपयोग किया हुआ चित्र एक बड़े बरगद के वृक्ष की तरह है, जो अपनी जड़ - यिशै से वृक्ष के तने का विस्तार करती है।
यशायाह के द्वारा राजवंश के लिए उपयोग किया हुआ चित्र एक बड़े बरगद के वृक्ष की तरह है, जो अपनी जड़ – यिशै से वृक्ष के तने का विस्तार करती है।

पहले एक वृक्ष…इसके पश्चात् एक ठूँठ….तत्पश्चात् एक शाखा

यशायाह ने चेतावनी दी थी कि इस वृक्ष को शीघ्र ही काटते हुए, इसे एक मृत ठूँठ के रूप में छोड़ दिया जाएगा। यहाँ पर दिया गया है कि उसने कैसे इस वृक्ष को चित्रित किया जो परिवर्तित होते हुए एक ठूँठ और शाखा की पहेली बन गया :

“तब यिशै के ठूँठ में से एक डाली फूट निकलेगी और उसकी जड़ में से एक शाखा निकलकर फलवन्त होगी। यहोवा आत्मा, बुद्धि और समझ का आत्मा, युक्ति और पराक्रम का आत्मा, और ज्ञान और यहोवा के भय का आत्मा — उस पर ठहरा रहेगा।” (यशायाह 11:1-2)

यशायाह ने चेतावनी दी कि राजवंश एक दिन मृत ठूँठ की जैसे हो जाएगा
यशायाह ने चेतावनी दी कि राजवंश एक दिन मृत ठूँठ की जैसे हो जाएगा

इस ‘वृक्ष’ का काट दिया जाना लगभग 600 ईसा पूर्व, यशायाह के 150 वर्षों पश्चात् घटित हुआ, जब बेबीलोन ने यरूशलेम पर विजय प्राप्त करते हुए, इसके लोगों और राजा को बेबीलोन खींचते हुए बन्धुवाई में ले गए (ऊपर दी हुई समयरेखा में लाल रंग वाला समयकाल)। इससे यहूदियों की बन्धुवाई आरम्भ हुई – जिसमें से कुछ भारत में निर्वासित हो गए थे। यिशै राजा दाऊद का पिता था, और इस कारण वह दाऊद वंशीय राजवंश का मूल या ठूँठ था। “यिशै की ठूँठ” इस कारण बिखर गए दाऊद के राजवंश का एक रूपक था। सावित्री और सत्यवान् की कहानी में, एक राजा का मृत पुत्र – सत्यवान् मिलता है। भविष्यद्वाणी में राजाओं के राजवंश की राजकीय रेखा का अन्त एक ठूँठ में जाकर मृत्यु जाएगा और राजवंश स्वयं में ही मर जाएगा।

शाखा: आने वाले “उस” के रूप में एक दाऊद की बुद्धिमानी से है

यिशै के मृत ठूँठ में डाली का फूट निकलना
यिशै के मृत ठूँठ में डाली का फूट निकलना

परन्तु भविष्यद्वाणी ने भविष्य में एक बरगद के वृक्ष के साथ जुड़े हुए चित्र को राजाओं के रूप में काट डाले जाने की तुलना में कहीं दूर आगे  तक देखा। जब बरगद का बीज जीवन आरम्भ करते हैं, तो वे अक्सर अन्य वृक्षों के ठूँठों के ऊपर करते हैं। ठूँठ अँकुरित होने वाले बरगद के वृक्ष का पोषण करता है। परन्तु एक बार जब बरगद के बीजगणन की स्थापना हो जाती है, तब यह पोषित करने वाली ठूँठ कहीं अधिक वृद्धि कर जाता है और कहीं अधिक लम्बी आयु के जीवन को व्यतीत करता है। इस ठूँठ को यशायाह ने पहले से ही एक नए ठूँठ के रूप में इसकी जड़ से अकुँरित होते हुए – एक शाखा से एक बरगद के वृक्ष में परिवर्तित होते हुए देख लिया था। यशायाह ने इस चित्र का उपयोग किया और इसकी भविष्यद्वाणी की थी कि एक दिन भविष्य में एक ठूँठ, जिसे एक शाखा  के रूप में जाना जाएगा, एक मृत ठूँठ में प्रगट हो जाएगी, ठीक वैसे ही जैसे बरगट की शाखाएँ वृक्ष की शाखाओं में ही फूट निकलती हैं। इस शाखा को “उस” कह कर उद्धृत किया गया है, इस तरह यशायाह एक विशेष व्यक्ति के लिए बात कर रहा है, जो राजवंश के नष्ट कर दिए जाने के पश्चात् दाऊद की राजकीय रेखा में निकल कर आता है। इस व्यक्ति के पास ज्ञान, सामर्थ्य और ऐसी बुद्धि की ऐसी क्षमता होगी कि मानो यह परमेश्‍वर का आत्मा ही इसके ऊपर वास कर रहा होगा।

एक पोषित करने वाली शाखा से बरगद का वृक्ष वृद्धि करता हुआ। शीघ्र ही इसकी और अधिक शाखाएँ और जड़ें फूट निकलेंगी।
एक पोषित करने वाली शाखा से बरगद का वृक्ष वृद्धि करता हुआ। शीघ्र ही इसकी और अधिक शाखाएँ और जड़ें फूट निकलेंगी।

पौराणिक कथाओं में बरगद का वृक्ष कई शताब्दियों तक अमरता का प्रतीक माना जाता रहा है। इसकी कल्पित जड़ें अतिरिक्त शाखाएँ बनाने वाली मिट्टी में वृद्धि करती हैं। यह दीर्घायु का प्रतीक है और इस प्रकार ईश्‍वरीय सृष्टिकर्ता का प्रतिनिधित्व करता है। यशायाह के द्वारा 750 ईसा पूर्व में इस शाखा को देख लिया गया था, जिसमें इसी तरह के ईश्‍वरीय गुण होंगे और यह राजवंशीय “ठूँठ” के लुप्त होने के पश्चात् लम्बी आयु तक जीवित रहेगा।

 

 

 

 

यिर्मयाह और शाखा

ऋषि-भविष्यद्वक्ता यशायाह ने एक मार्ग-सूचक स्तम्भ खड़ा किया था, ताकि लोग भविष्य की प्रगट होती हुई घटनाओं को समझ सकें। परन्तु यह कई चिन्हों में उसके द्वारा दिया हुआ एक चिन्ह था। यिर्मयाह, यशायाह से 150 वर्षों पूर्व, लगभग 600 ईसा पूर्व में, तब रहा जब दाऊद के राजवंश को उसकी आंखों के सामने नष्ट कर दिया गया था, उसने ऐसा लिखा है:

यहोवा की यह भी वाणी है : देख ऐसे दिन आते हैं जब मैं दाऊद के कुल में एक धर्मी अंकुर उगाऊँगा, और वह राजा बनकर बुद्धि से राज्य करेगा, और अपने देश में न्याय और धर्म से प्रभुता करेगा। उसके दिनों में यहूदी बचे रहेंगे, और इस्राएली लोग निडर बसे रहेंगे। और यहोवा उसका नाम: यहोवा हमारी धार्मिकता रखेगा।” (यिर्मयाह 23:5-6)

यिर्मयाह ने यशायाह द्वारा प्रदत्त दाऊद वंशीय राजवंश के शाखा  के चित्र को और अधिक विस्तारित किया है। यह शाखा एक राजा भी होगी। परन्तु यह दाऊद वंशीय पहले जैसे राजाओं की तरह नहीं होगी, जिन्हें ठूँठ तक काटा डाला गया था।

शाखा : यहोवा हमारी धार्मिकता

इस शाखा में भिन्नता इसके नाम में देखी जा सकती है। उसके पास परमेश्‍वर का ही नाम (‘यहोवा’ – परमेश्‍वर के लिए यहूदियों द्वारा उपयोग होने वाला नाम) होगा, इस कारण एक बरगद के वृक्ष की तरह इस शाखा को एक अलौकिक चित्र दिया गया है। वह साथ ही ‘हमारी’ (हम मनुष्यों की) धार्मिकता  भी होगा।

जब सावित्री ने यम के साथ अपने पति, सत्यवान् की मृत शरीर के लिए विवाद किया, तब यह उसकी धार्मिकता थी, जिसने उसे मृत्यु (यम) का सामना करने के लिए सामर्थ्य प्रदान की। परन्तु, जैसा कि कुम्भ मेला नामक लेख में ध्यान दिया गया है, हमारी समस्या हमारी भ्रष्टता और पाप है, और इस कारण हमारे पास ‘धार्मिकता’ की कमी है। बाइबल हमें बताती है कि इसलिए हमारे पास मृत्यु का सामना करने के लिए कोई सामर्थ्य नहीं है। सच्चाई तो यह है कि हम इसके विरूद्ध असहाय हैं… जिसके पास मृत्यु की सामर्थ्य है – अर्थात्, शैतान – और उन सभी को जो अपनी मृत्यु के डर से अपने सारे जीवन भर इसकी दासता में जीवन व्यतीत करते हैं, वह स्वतन्त्र कर दे (इब्रानियों 2:14ब-15)

बाइबल में यम को शैतान के रूप में दर्शाया गया है, जिसके पास हमारे ऊपर मृत्यु की सामर्थ्य प्रदान की गई है। सच्चाई तो यह है, कि ठीक वैसे ही जैसे यम सत्यवान् के शरीर के लिए विवाद कर रहा था, बाइबल एक स्थान पर शैतान के द्वारा एक शरीर के ऊपर विवाद करने के वृतान्त को प्रदान उल्लेखित करती है, जब

… प्रधान स्वर्गदूत मीकाईल ने, जब शैतान से मूसा के शव के विषय में वाद विवाद किया, तो उसको बुरा भला कहके दोष लगाने का साहस न किया पर यह कहा, “प्रभु तुझे डाँटे!” (यूहदा 1:9)

इसलिए, जबकि शैतान के पास सावित्री और सत्यवान् की कहानी में यम की तरह मूसा जैसे एक सज्जन भविष्यद्वक्ता के शरीर के ऊपर विवाद करने का अधिकार है, तब तो उसके पास निश्चित रूप से हमारे पाप और भ्रष्टता के कारण हम पर आने वाली मौत – के ऊपर अधिकार है। यहाँ तक कि प्रधान स्वर्गदूत ने यह भी यह स्वीकार किया केवल प्रभु – सृष्टिकर्ता परमेश्‍वर – के पास ही मृत्यु के विषय में शैतान को डाँटने का अधिकार है। और यहाँ ‘शाखा’ में एक प्रतिज्ञा दी गई है कि भविष्य में प्रभु परमेश्‍वर हम में उसकी ‘धार्मिकता’ को रोपित करेगा, ताकि हम मृत्यु के ऊपर जय को प्राप्त कर सकें। परन्तु कैसे? जकर्याह इसी विषय के ऊपर और अधिक विस्तार करते हुए आगे के वृतान्त को आने वाली शाखा के नाम  की भविष्यद्वाणी को करते हुए पूरा करता है, जो कि सावित्री और सत्यवान् की मृत्यु (यम) के ऊपर जय प्राप्त करती हुई कहानी के समानान्तर है – जिसे हम अगले लेख में देखेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *